लता मंगेशकर और आशा भोसले ने किशोर के साथ डुएट गाना बंद कर दिया था। कारण बहुत ही मजेदार था। डुएट में किशोर अपना मुखड़ा गा लेते थे पर जब लता या आशा की बारी आती तो कुछ न कुछ ऐसी मिमिकरी कर देते की हँसना रुकता ही नहीं। पेट में बल ही नहीं पड़ते, लता और आशा की शिकायत थी की उनका हँसते-हँसते गला बैठ जाता। रेकोडिंग मुल्तवी कर दी जाती। इसके कारण आर्थिक नुकसान के अलावा अगले डेट्स मिलने में भी परेशानी होती। बहुत अरसे तक, डुएट अकेले-अकेले रेकॉर्ड कर उन्हें मिक्स कर दिया जाने लगा ।
एक गाना ऐसा आन पड़ा जो बातचीत की तर्ज़ पर था। “आपकी कसम” का यह डुएट साथ-साथ गाना जरूरी था। मामले की नज़ाकत देखते हुए, लता मान गई।
रिकॉर्डिंग रूम में सब कोई जमा हो गए। किशोर पहली बार संजीदा दिखे। सब तैयारी हो गई। भला किशोर इतनी देर चुप कैसे रहते। जैसे ही किशोर ने मुंह खोला , लता उठकर बाहर जाने लगीं। किशोर मिन्नत करते हुए बोले- दीदी, मैं जो कहने जा रहा हूँ वह इस गाने की बाबत ही कहने जा रहा हूँ। लता मान गईं।
किशोर ने कहा की इस गाने की लाइन से लगता है की गाने वाले कमोड पर बैठ कर गा रहे हैं। गाने की शुरुआती बोल पर ध्यान दीजिएगा -
“सुनो
कहो कहा सुना
कुछ हुआ क्या?
अभी तो नहीं
कुछ भी नहीं”
अभी लता का हँसना अपनी ऊंचाई पर पंहुचना बाकी ही था की किशोर ने बाकी कसर पूरी कर दी। अब आखिरी मुखड़ा सुन लीजिये -
“चली हवा
झुकी घटा
कुछ हुआ क्या?
ज़रा सा कुछ हुआ तो है ...”
लता का हँसते-हँसते पेट ऐठने लग गया। गला बैठ गया। रेकोडिंग फिर मुल्तवी हो गई।
एक गाना ऐसा आन पड़ा जो बातचीत की तर्ज़ पर था। “आपकी कसम” का यह डुएट साथ-साथ गाना जरूरी था। मामले की नज़ाकत देखते हुए, लता मान गई।
रिकॉर्डिंग रूम में सब कोई जमा हो गए। किशोर पहली बार संजीदा दिखे। सब तैयारी हो गई। भला किशोर इतनी देर चुप कैसे रहते। जैसे ही किशोर ने मुंह खोला , लता उठकर बाहर जाने लगीं। किशोर मिन्नत करते हुए बोले- दीदी, मैं जो कहने जा रहा हूँ वह इस गाने की बाबत ही कहने जा रहा हूँ। लता मान गईं।
किशोर ने कहा की इस गाने की लाइन से लगता है की गाने वाले कमोड पर बैठ कर गा रहे हैं। गाने की शुरुआती बोल पर ध्यान दीजिएगा -
“सुनो
कहो कहा सुना
कुछ हुआ क्या?
अभी तो नहीं
कुछ भी नहीं”
अभी लता का हँसना अपनी ऊंचाई पर पंहुचना बाकी ही था की किशोर ने बाकी कसर पूरी कर दी। अब आखिरी मुखड़ा सुन लीजिये -
“चली हवा
झुकी घटा
कुछ हुआ क्या?
ज़रा सा कुछ हुआ तो है ...”
लता का हँसते-हँसते पेट ऐठने लग गया। गला बैठ गया। रेकोडिंग फिर मुल्तवी हो गई।
बहुत मज़ेदार संस्मरण
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