वैसे तो 1990-1991 की फिल्म “हम” एक साधारण फिल्म थी पर उसका एक डायलाग तबसे मतलब ढूँढता रहा । इस डायलाग की
खासियात यह थी कि ऐसा लगता था कि इसे बाद में डाला गया हो । पर क्यों ? क्या इस डायलाग
के द्वारा कोई मेसेज या उत्क्रोश जाहिर करने की जरूरत आन पड़ी थी । बिलकुल ऐसा ही था
ऐसा मेरा विश्वास है ।
यह डायलाग अमिताभ बच्चन ने डलवाया था और इसे कई बार दोहराया भी गया था, हरबार एक नए अंदाज में एक दूसरी गहराई में । ये वह समय था जब
राजीव गाँधी के चहेते, अमिताभ इलाहाबाद से 62 प्रतिशत से जीतकर बने एमपी जल्दी ही बड़ी मायूसी के साथ राजनीती से
बेआबरू होकर सदा के लिए बाहर हो गए ।
वह गजब का डायलाग था – “ दुनिया में दो तरह के कीड़े होते है ........“ । न कभी आपने इसपर गौर करने की जरूरत समझी होगी न और
किसी ने । पर आज 2015 में उस डायलाग का अर्थ
समझ में आ रहा है । जो मेरी समझ में आया वह यह है ।
दुनिया में दो तरह के कीड़े होते हैं । एक जो गटर से निकलता है और दूसरा वह जो पाप से जन्म
लेता है । गटर वाले कीड़े से बीमारी फैलती है पर उसे कीटनाशक से मारा जा सकता है । पाप से निकला कीड़ा
बहुत भयानक होता है यह किसी भी तरह नहीं मरता ।
गटर से निकला कीड़ा गुंडा मवाली होता है जिन्हें पुलिस और कानून सजा देकर ठीक
कर सकता है । पर पाप का कीड़ा अपनी गन्दगी फैलाता रहता है, वह आज के दिन सभी शिकंजो से बाहर
है ।
ये पाप के कीड़े कौन हैं इसे आप और हम दोनो जानते हैं पर बेबस हैं । अमिताभ बच्चन ने
बहुत पहले जान लिया था । इसीलिये तो वह अमिताभ है ।
इस डायलाग को भी अमिताभ ने खुद लिखा होगा । ऐसी सधी गाली इलाहबाद का
छोरा ही दे सकता था ।
आज मुझे एक वाक्य जोड़ने की इच्छा हो रही है जो शायद पूरी बात ठीक ठाक समझा दे ।
आदमी जब इंसान से कीड़ा बन जाता है तब या तो वह गन्दी नाली का कीड़ा बनता है या फिर पाप
का ।
