आज हमलोग ऑस्ट्रेलिया में छः माह के प्रवास के बाद लौट जायेंगे अपने वतन. अहले सुबह श्रीमती भी तैयार हो गयीं टहलने के लिए. रास्ते भर याद दिलाती रही कि अब कल ये नहीं दिखेगा , वो नहीं सुनायी देगा वगैरह.
आज तालाब पर भी जैसे सभी बत्तकें लौट आयी थी विदाई पार्टी के लिए. हमलोग भी काफी मात्रा में रोटी/ब्रेड ले गए थे. सूर्य देवता भी बादलों पर भरसक ज्यादा ही रंग बिखेर रहे थे.
घर लौटा. बेटी ने नाती को तैयार कर दिया था स्कूल के लिए. आज आखिरी बार मैं उसे स्कूल ले जा रहा था. हमेशा चहकने वाला आज रास्ते भर साईं ने बात नहीं की. मैं जब पूछा तो उसने कहा कि वह उदास है. फिर उसने सर उठाकर मेरी आँखों में झांका और तुरत जोड़ा- नानू, तुम्हारे जाने के चलते नहीं, बल्कि कल मेरी फेनली से लड़ाई हो गयी है. मैंने कुछ नहीं कहा . कल उसे स्कूल से वापिस लाते वक्त हमेशा की तरह फेनली से गले मिलते देखा था.
घर लौटा तो ऐप पर मेरे मित्र लक्ष्मी का हैप्पी जर्नी का सन्देश देखा. उसे धन्यवाद् देने के लिए मैंने फ़ोन किया. उसने पूछ - उदास हो. मैंने कहा- नहीं ! अब आदत सी हो गयी है. उसने कहा- अरे यार ! काफी अरसे के बाद जेल से छूटते वक्त कैदी भी रोने लगता है.
लक्ष्मी ठीक कह रहा था. मेरा अनुभव तो कुछ ज्यादा ही हैरानीयत भरा था . मेरी एक दूर के रिश्ते की मौसी को जब दुबारे वापिस पागलखाने ले जाया जा रहा था तो रास्ते भर वह बहुत उदास रही. पागल खाने की ऊंची गेट को देख कर उसका चेहरा खिल गया और अन्दर पहुंचते ही वह दूर खड़ी डॉक्टर श्रीमती डेविस के पास दौड़ती हुई पहुंची और खिलखिला कर गले मिली थी.
फिल्म बूट पोलिश का वह मशहूर गाना " रात गयी फिर दिन आता है. इसी तरह आते जाते ही यह सारा जीवन जाता है" , मैंने लक्ष्मी को ऐप करना मुनासिब समझा.
आज तालाब पर भी जैसे सभी बत्तकें लौट आयी थी विदाई पार्टी के लिए. हमलोग भी काफी मात्रा में रोटी/ब्रेड ले गए थे. सूर्य देवता भी बादलों पर भरसक ज्यादा ही रंग बिखेर रहे थे.
घर लौटा. बेटी ने नाती को तैयार कर दिया था स्कूल के लिए. आज आखिरी बार मैं उसे स्कूल ले जा रहा था. हमेशा चहकने वाला आज रास्ते भर साईं ने बात नहीं की. मैं जब पूछा तो उसने कहा कि वह उदास है. फिर उसने सर उठाकर मेरी आँखों में झांका और तुरत जोड़ा- नानू, तुम्हारे जाने के चलते नहीं, बल्कि कल मेरी फेनली से लड़ाई हो गयी है. मैंने कुछ नहीं कहा . कल उसे स्कूल से वापिस लाते वक्त हमेशा की तरह फेनली से गले मिलते देखा था.घर लौटा तो ऐप पर मेरे मित्र लक्ष्मी का हैप्पी जर्नी का सन्देश देखा. उसे धन्यवाद् देने के लिए मैंने फ़ोन किया. उसने पूछ - उदास हो. मैंने कहा- नहीं ! अब आदत सी हो गयी है. उसने कहा- अरे यार ! काफी अरसे के बाद जेल से छूटते वक्त कैदी भी रोने लगता है.
लक्ष्मी ठीक कह रहा था. मेरा अनुभव तो कुछ ज्यादा ही हैरानीयत भरा था . मेरी एक दूर के रिश्ते की मौसी को जब दुबारे वापिस पागलखाने ले जाया जा रहा था तो रास्ते भर वह बहुत उदास रही. पागल खाने की ऊंची गेट को देख कर उसका चेहरा खिल गया और अन्दर पहुंचते ही वह दूर खड़ी डॉक्टर श्रीमती डेविस के पास दौड़ती हुई पहुंची और खिलखिला कर गले मिली थी.




