आज फेसबुक पर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस पर एक
विडियो स्ट्रीमिंग देख हैरत में आ गया । यह विडियो
भविष्य में रोबोट तकनीकी के विकास और उसके इस्तेमाल से सम्बंधित था । आश्चर्य
तब हुआ जब अंत में यह दिखाई पडा कि 120
वर्षों में रोबोट-गिरी के चलते बेरोजगारी चरम सीमा पर पहुँच जायेगी और शायद
सभी बेरोजगार हो जाएँ । ऐसी अफवाह तब भी फ़ैली थी जब कंप्यूटर का प्रसार-प्रचार हो
रहा था ।
विडियो में दिखाया गया है कि आने वाले 120
वर्ष में रोबोटिक इतना विकसित हो चुका होगा की मनुष्य को कोई कार्य करने की
आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी । शायद रोबोट मनुष्य पर हुकूमत भी चलाने लग जाए । आज के
दिन अमेरिका और रूस रोबोट की लड़ने वाली फ़ौज बना रहे है जो जल-थल-वायु तीनो में
अपनी ताकत से चकित और काफी आबादी को लाचार कर सकता है । चिकित्सा और अन्वेषण के क्षेत्र
में तो हमलोग रोबोट की सहायता लेने ही लगे है ।
सुधिजन संभवतः रोजगार का सीमित अर्थ लगा
बैठे हैं – काम के बदले पैसा - वह भी नौकरी-पेशे से सम्बंधित । आज से हजार वर्ष
पहले भी और आज भी ऐसे रोजगारयाफ्ता आबादी का 10-15 % ही रहे हैं । स्वरोजगारी और किसान की संख्या सभी देशों में काफी है । बेरोजगारी की बात हम तब कर रहे है जब इस पृथ्वी पर जितना कार्य इस
समय दिख रहा है उसका 1% भी नहीं हो रहा है । कुछ तो हाथ में गिनाये जा सकते हैं और
जिसमें कुछ में सफलता हासिल करने में ही सैकड़ों वर्ष लग जायेंगे- जैसे
·
गरीबी : विश्व की 80% आबादी
गरीब हैं ।
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सागर : 95% क्षेत्र का
अन्वेषण बाकी है ।
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पर्यावरण : अगले 120
वर्ष में बढ़ता तापमान
और घटता ओजोन मात्र रोबोट को रास आयेगा ।
·
शिक्षा : विश्व की 26% जनसंख्या अभी भी
अशिक्षित है ।
ऐसी सैकंडों समस्याएं और संभावनाएं हैं
जिनके निदान में मानव-रोजगार की अटूट आवश्यकता है क्योंकि रोबोट को मानव जितना संवेदनशील बनने की संभावना कम ही दिखती है ।
संभवतः यह मात्र कपोल कल्पना ही हो की
मानव अपने मस्तिष्क का मात्र 10% ही प्रयोग कर पाता है । यह सत्य है की आइंस्टीन जिन्हें
जीनियस माना जाता है उनका मस्तिष्क आम
मानव से 15% बड़ा था । इससे यह तो विदित होता ही है की हमलोग अवश्य मानते हैं की हमें
अपने मस्तिष्क का पूरा 100% प्रयोग कर बहुत कुछ हासिल करना है । सर्वगुणसंपन्न
भावी रोबोट भी हमारी 10% सक्रीय मस्तिष्क की देन है । कितनी अचम्भे की बात है की
रोबोट मशीन जिसे
मानव ने मानव के लिए बनाया है वह उस प्राकृतिक मानव पर हावी हो जाएगा जिसे प्रकृति
ने प्रकृति के लिए बनाया है । रोबोट मानव सभ्यता के
भविष्य का मात्र एक मील का पत्थर हो सकता है, मानव का मालिक नहीं ।
मानव अपनी कार्य दक्षता और ताकत बढाने के लिए सदियों से अस्त्र-शस्त्र, यंत्र-मन्त्र की सहायता लेता रहा है. पत्थर और गुलेल के समय से बढ़ते-बढ़ते हमलोग लेज़रगन और एटम बम की दुनिया से बहुत आगे बढ़ गए हैं,
मानव अपनी कार्य दक्षता और ताकत बढाने के लिए सदियों से अस्त्र-शस्त्र, यंत्र-मन्त्र की सहायता लेता रहा है. पत्थर और गुलेल के समय से बढ़ते-बढ़ते हमलोग लेज़रगन और एटम बम की दुनिया से बहुत आगे बढ़ गए हैं,
21वी सदी के अंत तक हमलोग STD बूथ पर लाइन
लगाते थे आज घर बैठे विडियो पर बातें करते हैं । आज का स्मार्टफ़ोन कल अवश्य पुराना
पड़ जाएगा । आज भारत जैसे देश में भी लगभग सभी के पास मोबाइल या स्मार्ट फ़ोन है ।
दस वर्ष पहले मात्र एक करोड़ हवाई यात्रा करते थे । आज यह संख्या 10 करोड़ पार कर गयी है । कल
नौकरीपेशे वाले आठ घंटे काम करके घर लौट आते थे । आज 16 घंटे आम बात हो गयी है ।
आज स्त्री-पुरुष मिलकर कमाते हैं फिर भी कमी खटकती ही है । आज 70-75 वर्षीय वरिष्ठ
नागरिक भी घर-बाहर या ऑनलाइन इन्टरनेट पर काम करता दिखेगा । अब न तो शाम की गोष्ठी
दिखती है और न हुक्का-पानी । हाँ, “Made for Each Other” के स्वप्न में खोये व्यक्ति के लिए सही रोजगार मिलने में देर भी है और
अंधेर भी ।
मानव अपनी परिभाषा खो देगा अगर वह
कर्मयोगी न रहा तो । स्मार्टफ़ोन, कंप्यूटर से लेकर रोबोट तक सभी उपकरण मानव की
सुविधा के लिए बने हैं । जो कार्य दिख रहा है और जो दिखेगा उसके लिए ये सभी साधन अभी
भी बहुत अपर्याप्त है लेकिन समयोपयोगी हैं । अभी तो मानव को पृथ्वी को पृथ्वी
बनाना है - उत्कृष्ट बनाना है । उसके बाद कई दूसरे ग्रहों से मित्रता करनी है ।
अभी तो असंख्य सूर्य, अनगिनत तारे, कोटि-कोटि आकाश गंगाएं,अरबों ब्रह्माण्ड के
बारे में जानना, समझना और संपर्क बनाए रखना बाकी है । और यह सब बिना नौकरी-पेशे और
रोजगार के असंभव है ।
अभी जब मात्र 10% मस्तिष्क सर्वगुणसंपन्न रोबोट
का निर्माण कर सकता है तो 100% मष्तिष्क का उपयोग तो मानव को सर्वशक्तिमान, सर्वभूत, सर्वज्ञ बना देगा-
वह बना देगा जो निरंतर का कर्मयोगी है ।
मेरी तकनीकी-ज्ञानशक्ति यह भान करा रही है की आज से 120 वर्ष बाद धरती
के मुश्किल कार्यों के लिए और अरबों प्रकाश वर्ष(1 light year=9 trillion Km) दूर के संधान के लिए मानव शारीरिक
रूप में स्वयम नहीं शामिल होगा. यह सभी कार्य अतिसक्षम स्मार्ट रोबोट करेंगे.
हमारी फोर डायमेंशनल मौजूदगी भर रहेगी. यह उपस्थिति क्वांटम टेलीपोर्टेशन(quantum teleportation) संभव
करेगा. साथ ही हमलोगों को रोबोट को नियंत्रण में रखने की प्रणाली सुदढ़ करनी होगी
जैसे लॉकिंग सिस्टम, पासवर्ड, गेट इत्यादि वह भी मानव हैकर्स को ध्यान में रखकर.
धरती की उम्रसीमा अरबों वर्ष है उसमें कुछ हजार मानव-वर्ष ही बीते हैं. यह मानव सभ्यता के आरंभिक क्षण हैं.
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