Monday, 29 April 2019

क्यों नाचे सपेरा

BBC को एक इंटरव्यू देते वक्त जावेद अख्तर से जब उनके पसंदीदा गीतकार के बारे में तब उन्होने कहा
देखिएजैसे गीतकार उस ज़माने में थे आज तो हम सोच भी नहीं सकते. साहिरशैलेन्द्रमज़रूहकैफ़ीएसएच बिहारी. राजा मेंहदी अलीप्रदीपभरत व्यास....इन सबमें मुझे साहिर बहुत पसंद थे. उन्होंने सिर्फ़ कमाई के लिए गाने नहीं लिखे. उनकी किसी भी फ़िल्म का गीत सुनिएएक-एक लाइन ढली हुई है.
दूसरे जीनियस थे शैलेन्द्र. दरअसलशैलेन्द्र का रिश्ता बनता है कबीर और मीरा से. बड़ी बात सादगी से कह देने का जो गुण शैलेन्द्र में थावो किसी में नहीं था. यहाँ तक कि ‘गम दिए मुस्तकिल’ से लेकर ‘आज मैं ऊपर आसमाँ नीचे’ जैसे गाने लिखने वाले मज़रूह साहब ने एक बार खुद मुझसे कहा था कि सच पूछो तो सही मायनों में गीतकार शैलेन्द्र ही हैं.
शैलेन्द्र का रिश्ता उत्तर भारत के लोक गीतों से था. लोक गीतों में जो सादगी और गहराई होती है वो शैलेन्द्र के गीतों में थी. ‘तूने तो सबको राह दिखाईतू अपनी मंजिल क्यों भूलाऔरों की उलझन सुलझा के राजा क्यों कच्चे धागों में झूला. क्यों नाचे सपेरा’.
अगर क्यों नाचे सपेरा जैसी लाइन मैं लिख पाऊँ तो इत्मीनान से जीऊँगा.
 01 दिसम्बर 2017 के दैनिक भास्कर में फिल्म समीक्षक जयप्रकाश चौकसे 
ने क्यों नाचे सपेराका अर्थ यों लगाया – “ संपेरा और सांप का रिश्ता भी लहरदार होता है। एक संपेरे को प्रेम हो जाता है और बड़ी परेशानी के बाद विवाह हो पाता है। सुहागरात को उसकी प्रिय सर्पिणी उसे काट लेती है। वह लंबे समय से उसका विष नहीं निकाल पाया था। प्रेम में डाह भी होती है। विजय आनंद की ‘गाइड’ में शैलेन्द्र के लिखे एक गीत में पंक्ति है- ‘आज क्यों नाचे संपेरा।’ शैलेन्द्र ने बड़ी गहरी बात की हैजिसका तात्पर्य यह है कि अवाम सपेरा है परंतु आज वह मंत्रमुग्ध होकर नाच रहा है। 
गाइड श्री आर के नारायण की पुस्तक का फिल्मीकरण था। फिल्म का नायक एक गाइड है। गाइड ज़्यादातर इतिहास और ऐतहासिक स्थानों का विशेषज्ञ होता है। वह पर्यटकों के हरेक प्रश्न का समाधान करता है। राजू गाइड अपने व्यवसाय के अतिरिकित कुछ ज्यादा ही चालाक था। वह उत्तर गढ़ भी लेता था। पर्यटकों के हरेक मुश्किलों का उसके पास सरल और सुगम समाधान होता था।
कैसे उसने एक विवाहित नृत्यांगना से मित्रता कीप्रेम कियाउसके पैसों से ऐश किया , धोखेधड़ी के मामले में जेल गया और सबकुछ खोकर जेल से बाहर आया यहीं से राजू गाइड में एक साफ-सुथरा मोड आता है। मुसाफिर तू जाएगा कहाँ राजू को उसकी आगे की यात्रा की ओर अग्रसर करने का थीम सॉन्ग है।
राजू वह सपेरा है जो औरों को नचाते-नचाते स्वयं नाचने लगा था ।



Monday, 15 April 2019

हरि कृपा अनंता


डॉक्टर सरकार एक वरिष्ठ श्वास संबंधी विशेषज्ञ हैं। उनके असिस्टेंट से मैंने दो दिन पहले ही अपॉइंटमेंट ले लिया था। आज सुबह से ही मुझे अस्थमा की तकलीफ बढ्ने लगी। इतना की बार–बार इन्हेलर लेना पद रहा था। किसी तरह एक बजे दोपहर को 2-3 ऑक्सिजन का पफ़ लेकर ओला कर डॉक्टर के क्लीनिक पहुँच गया। काफी भीड़ थी, कोई भी बैठने की जगह नहीं दिख रही थी। दूसरे कमरे से लाकर मेरे लिए कुर्सी रखी गई दरवाजे के पास।
डॉक्टर 2 बजे आए। डॉक्टर हरेक मरीज को 20 से 30 मिनट देते हैं। मेरा नंबर 10 था। इस तरह मुझे 5 घंटे तो अवश्य लाग्ने थे। लगभग 4 बजे मेरी उम्र का एक मरीज बुरी तरह हाफते हुए 2 लोगों का सहारा लेकर दाखिल हुआ। लंबी दाढ़ी भी बुरी तरह काँप रही थी। जगह तो थी नहीं, वह चारो तरफ देखकर हताश होकर दरवाजे के सहारे खड़ा हो गया। मेरी तबीयत उससे बेहतर थी। मैंने खड़े होकर उसे बैठा दिया और कॉरिडॉर का चक्कर लगाने निकाल पड़ा। लगभग 15 मिनट बाद दाखिल हुआ। तभी डॉक्टर ने उस मरीज को बुला लिया।
अभीतक डॉक्टर 4 मरीज़ ही देख पाये थे। इस तरह मेरा नंबर आने में 3 घंटे अवश्य लगने वाले थे। कुर्सी पर बैठते ही थोड़ी देर बाद मुझे झपकी आ गई । अचानक मेरी बुलाहट हुई। वह मुस्लिम मरीज बाहर निकाल रहा था। वह हाँफ भी नहीं रहा था। अवश्य उसे नेबुलाइज़र दिया गया होगा। वह मुझे आशीष देते हुए मेडिसिन स्टोर की तरफ चला गया । मैं डॉक्टर के कमरे मे दाखिल हुआ। जांच के बाद ब्लड सैंपल देने पड़ोस के लाल पैथ लैब चला आया।
अवश्य डॉक्टर को असिस्टेंट या उस मरीज ने कुछ कहा होगा नहीं तो इतने जल्दी वह नहीं बुलाते या फिर “हरि कृपा अनंता“।