हम
सभी वरिष्ठ नागरिक अपनी उम्र और स्वास्थ्य से ताल मिलाते हुए 3 से 8 किलोमीटर की सुबह की सैर के
बाद कोई 7 बजे
सोसाइटी के पार्क की बेंच पर बैठ थोड़ी गप-शप लड़ाने के लिए जुट जाते हैं । एक ग्रुप
अवकाश प्राप्त पुलिस अधिकारियों का है और दूसरा मिला-जुला इंजिनियर-डॉक्टर और सिविल
सर्विस का है । पहला ग्रुप 6-7 jजन का है और ज्यादा मुखर है ।
नोटबंदी के बाद तो जैसे पूरी तरह मोदी शासन के विरूद्ध हो गया है । उन्हें वर्तमान
शासन की कोई भी बात पसंद नहीं आती । इस पक्षपातपूर्ण रवैये से बाकि उपस्थिति
परेशान हो जाती है खासकर युवा वर्ग जो बेंच के सामने बने जॉगिंग ट्रैक पर
प्राणायाम, योग और व्यायाम करते रहते हैं । मैं इन हंसों के बीच कौआ हूँ, कभी-कभी
ही इस पार्क में आना होता है ।
आज पुनः मोदी विरोधी वार्ता लम्बी खीच रही थी । डॉक्टर ने टॉपिक
बदलने के लिए कहा तो बात चीन-भारत दोक्लाम सीमा विवाद पर आ गयी । पुलिस ग्रुप में
से एक ने कहा की भारत में कहाँ दम है चीन से लड़ने का । भारत बात ही बनाता रहता है
और चीन का बनाया सामान पूरी दुनिया में फ़ैल गया है । भारत-चीन सीमा पर चीन ने
सड़कों की घेराबंदी कर रखी है । चीन तो अब अपनी विशाल दीवाल के नीचे सबसे लाबी
मेट्रो ट्रैक की सुरंग बना रहा है । हमलोग चुपचाप चीन चालीसा सुन रहे थे और उन्हें भुगत रहे
थे । सामने व्यायाम करते एक किशोर भी सुन रहा था । उससे रहा न गया ।
उस किशोर ने मुस्कुरा कर कहा –“ अंकल ! हमारे भारत में बोलने
की आजादी है चीन में बोलने पर पूरी पाबंदी । समय की बर्बादी तो उनकी सोच के भी परे
है ।चीन में 80 वर्ष से ऊपर के लोग भी योगदान करते दिखेंगे । खैर मनाईये आप चीनी नहीं है । चीनी होकर चीन के किसी पार्क में बैठ भारत की
बडाई कर रहे होते तो अबतक आपको जेल
में डाल दिया जाता । वहाँ कम्युनिस्ट शासन है । हमारा गणतंत्र भारत इतनी बड़ी
आबादी के साथ, विविधता
के साथ उन्नति कर रहा है जिसे पूरा विश्व आदर से देख रहा है । “
सबसे मुखर चौधरी जी को यह
वाचालता अप्रिय लगी, साथ ही उनके अहम को आघात । उन्होंने कहा की इस उम्र में तो अब
परिचर्चा ही मनोरंजन का साधन है नहीं तो तुम्हारी पीढ़ी कब घास डालती है ? इसका
जवाब एक दूसरे युवक के पास था । उसने आदर
के साथ कहा–“अंकल ! बच्चों का साथ कीजिये । उन्हें पढ़ाइये, अच्छी बातें सिखाईये,
हमलोगों से बेहतर इंसान बनाईये । हमलोगों को भी शामिल कीजिये ।”
कितना कुछ छिपा था इन वचनों में ! सत्य में भारत महानता की
तरफ बढ़ता जा रहा है । हो भी क्यों नहीं जिस देश की 50% से अधिक की आबादी की उम्र
35 से कम हो और ऐसी समझ वाले किशोर हों ।
भविष्य में, पार्क कुछ रचनात्मक परिचर्चाओं का साक्षी बनेगा ऐसा विश्वास
है ।

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