बहुत
वर्षों बाद , आज पुनः
बच्चों को तिरंगा फहराते देखा । गौर करने पर बहुत सारे कारण याद आते हैं जिनके
चलते राष्ट्रीय तिरंगा अपने भारतवर्ष में ही अजनबी बन गया । कोई शक नहीं आजादी
मिलने के कुछ वर्षों तक तिरंगे की धूम रही होगी । 15 अगस्त 1955 के कुछ दिन पहले पटना
के बी०एन०कॉलेज के 9 छात्र पुलिस फायरिंग में मारे गए थे । उससे आक्रोशित होकर स्वतंत्रता दिवस को किसी ने तिरंगे के बगल में काला झंडा लगा दिया था । लोगों ने
शहीद हुए युवको का अपार दुःख होते हुए भी काला झन्डा फाड़ कर फेंक दिया था । 26
जनवरी और 15 अगस्त को मेरे घर पर तिरंगा फहराने की प्रथा 2000 तक पिताजी के
स्वस्थ्य रहने तक कायम रही । इस प्रथा को लुप्त करने में हमारी पीढ़ी को पूर्णतः
दोष दिया जा सकता है ।
मुझमें तिरंगे से बेरुखी का
दोष कैसे पनपा बताना आवश्यक है । एक कारण तो साफ़ दिखता है । मैं इस तिरंगे को हर उन
वाहनों पर देखता था जो ज्यादातर भ्रष्टता से लिप्त थे । तिरंगे के साथ-साथ, रगीन
बत्तियां, कमांडो
एस्कॉर्ट्स, वाहनों के
काफिले से होने वाली यातायात असुविधा की बढती बाढ़ ने मुझे और भी तिरंगे से दूर कर
दिया । साथ ही सब नेताओं के सर से गाँधी
टोपी भी गायब हो गयी । शायद इन्हें भी शर्म आती होगी या फिर खूबसूरती में कमी होने
का भय होगा । महात्मा गाँधी, जिन्हें टॉलस्टॉय, आइंस्टीन, मार्टिन
लूथर और आज भी मंडेला और ओबामा अपना आइकॉन मानते हैं , उस गाँधी और उनके स्मृति चिन्ह
गाँधी टोपी को आज के नेताओं ने बड़ी उदासीनता से भुला दिया ।
इस लुप्तप्रायः तिरंगे और टोपी को गायब कर बेईमानी और भ्रष्टाचार ने भरपूर जगह बना ली है । भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर
है । सबसे ज्यादा दोषी सरकारी नौकरी-याफ्ता हैं । तिरंगा मात्र सरकारी भवनों की
शोभा बढाता है । अब तो कुछ समुदाय और राजनीतिक पार्टियां भी तिरंगे का अपमान करने
लगी हैं ।
इस दिशा में मेरा प्रयास सतत है । मैं जहां कहीं भी लोगों के साथ उठता-बैठता हूँ तिरंगे के प्रति सुधिजन को जागरूक करने का प्रयत्न करता हूँ ।
समय-समय पर सोशल मीडिया पर ब्लॉग के जरिये विचारों का आदान-प्रदान भी करता रहता हूँ । साथ ही ट्वीट भी करता रहता हूँ । मैंने "मेरी सरकार " पोर्टल के माध्यम से प्रधान मंत्री जी से भी प्रार्थना की है । ऐसे ही सबको कोशिश करनी चाहिए । बूँद-बूँद कर भी घड़ा भरा जा सकता है । आशा है वर्ष २०१८ के स्वाधीनता दिवस पर देशप्रेम प्रदर्शित करने के इस अवसर का भारतीय नागरिक भरपूर उपयोग कर गर्वान्वित होंगे ।
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