Tuesday, 15 August 2017

तिरंगा

बहुत वर्षों बाद , आज पुनः बच्चों को तिरंगा फहराते देखा । गौर करने पर बहुत सारे कारण याद आते हैं जिनके चलते राष्ट्रीय तिरंगा अपने भारतवर्ष में ही अजनबी बन गया । कोई शक नहीं आजादी मिलने के कुछ वर्षों तक तिरंगे की धूम रही होगी । 15 अगस्त 1955 के कुछ दिन पहले पटना के बी०एन०कॉलेज के 9 छात्र पुलिस फायरिंग में मारे गए थे । उससे आक्रोशित होकर स्वतंत्रता दिवस को किसी ने तिरंगे के बगल में काला झंडा लगा दिया था । लोगों ने शहीद हुए युवको का अपार दुःख होते हुए भी काला झन्डा फाड़ कर फेंक दिया था । 26 जनवरी और 15 अगस्त को मेरे घर पर तिरंगा फहराने की प्रथा 2000 तक पिताजी के स्वस्थ्य रहने तक कायम रही । इस प्रथा को लुप्त करने में हमारी पीढ़ी को पूर्णतः दोष दिया जा सकता है ।

मुझमें तिरंगे से बेरुखी का दोष कैसे पनपा बताना आवश्यक है । एक कारण तो साफ़ दिखता है  मैं इस तिरंगे को हर उन वाहनों पर देखता था जो ज्यादातर भ्रष्टता से लिप्त थे । तिरंगे के साथ-साथरगीन बत्तियांकमांडो एस्कॉर्ट्सवाहनों के काफिले से होने वाली यातायात असुविधा की बढती बाढ़ ने मुझे और भी तिरंगे से दूर कर दिया ।  साथ ही सब नेताओं के सर से गाँधी टोपी भी गायब हो गयी । शायद इन्हें भी शर्म आती होगी या फिर खूबसूरती में कमी होने का भय होगा महात्मा गाँधी, जिन्हें टॉलस्टॉय, आइंस्टीन, मार्टिन लूथर और आज भी मंडेला और ओबामा अपना आइकॉन मानते हैं , उस गाँधी और उनके स्मृति चिन्ह गाँधी टोपी को आज के नेताओं ने बड़ी उदासीनता से भुला दिया ।
इस लुप्तप्रायः तिरंगे और टोपी को गायब कर बेईमानी और भ्रष्टाचार ने भरपूर जगह बना ली है  भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है । सबसे ज्यादा दोषी सरकारी नौकरी-याफ्ता हैं । तिरंगा मात्र सरकारी भवनों की शोभा बढाता है । अब तो कुछ समुदाय और राजनीतिक पार्टियां भी तिरंगे का अपमान करने लगी हैं ।
आज जब मैंने कुछ बच्चों को तिरंगा फहरा कर जन-मन गाते और सलामी देते देखा तो मैंने अपने छोटे भाई के साथ प्रण किया की इस देशभक्ति उजागर करने वाले उत्सव को पुनः बहाल करने का प्रयत्न करूंगा- लोगों के मध्य सन्देश फैला कर और प्रधान मंत्री जैसे विश्वसनीय पोर्टल पर आग्रह कर । तिरंगा भारतीय पहचान का आधार कार्ड से भी ज्यादा शक्तिशाली बायोमेट्रिक होगा ऐसा मेरा विश्वास है ।  
इस दिशा में मेरा प्रयास सतत है  मैं जहां कहीं भी लोगों के साथ उठता-बैठता हूँ तिरंगे के प्रति  सुधिजन को  जागरूक करने का प्रयत्न करता हूँ । 

समय-समय पर सोशल मीडिया पर ब्लॉग के जरिये विचारों का आदान-प्रदान भी करता रहता हूँ  साथ ही ट्वीट भी करता रहता हूँ  मैंने "मेरी सरकार " पोर्टल के माध्यम से प्रधान मंत्री जी से भी प्रार्थना की है  ऐसे ही सबको कोशिश करनी चाहिए  बूँद-बूँद कर भी घड़ा भरा जा सकता है   आशा है वर्ष २०१८ के स्वाधीनता दिवस पर देशप्रेम प्रदर्शित करने के इस  अवसर का भारतीय नागरिक  भरपूर उपयोग कर गर्वान्वित होंगे 






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