Wednesday, 19 July 2017

आधार है तो आसानी है

वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार हटाओ अभियान और जन लोकपाल आन्दोलन सभी को विचलित कर रहा था. अधिकांश बुद्धिजीवी यह महसूस करते थे की भ्रष्टाचार व् बेईमानी भारत वर्ष का कैंसर बन चुकी है और इसका निवारण असंभव सा है. तभी मुझे आधार कार्ड की विशिष्टता ने आकर्षित किया. इस 12 अंकों वाले पहचान कार्ड में बायोमेट्रिक और डेमोग्राफिक ऐसा मेल था जो प्रत्येक भारतीय को एक विशिष्ट पहचान देती थी. यह विश्व का पहला डिजिटल प्रयत्न था जिसमें महात्मा गाँधी के सत्याग्रह की गूँज थी. बहुतेरी अनियमितताये स्वत ख़त्म होती दिखती थी, आधार कार्डधारी की पारदर्शिता और ईमानदारी में बहुत जल्द निखार आता दिख रहा था. दिसम्बर 2011 में मैंने आधार कार्ड बनवा लिया.

इसके दूसरे चरण को भी मैंने जल्द ही पंजीकृत करा लिया जैसे बैंक, गैस वितरण, पैन कार्ड वगैरह से लिंकिंग. गैस की सब्सिडी समय पर मेरे बैंक खाते में जाने लगी. आनंद तब आया जब स्मार्ट फोन के सिम के लिए मात्र आधार कार्ड ने पहचान पत्र और फोटो की आवश्यकता समाप्त कर दी. ऑनलाइन इनकम टैक्स रिटर्न भरने के बाद ITR-V फॉर्म की औपचारिकता भी आधार कार्ड से लिंक कर ऑनलाइन पूरी कर डाकघर के चक्कर से छुटकारा दिला दिया. 

मेरे जैसे वरिष्ठ नागरिक के लिए आधार कार्ड वरदान बनकर अवतरित हुआ है. आधार कार्ड निरंतर विकसित होकर सत्याग्रह का हस्ताक्षर बनेगा ऐसा मेरा विश्वास है. कोई आश्चर्य नहीं कि सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते कदम आधार कार्ड को निकट भविष्य में प्रत्येक भारतीय नागरिक के आत्म-विवरण-जैसे शैक्षणिक योग्यता, व्यावसायिक अनुभव इत्यादि का समावेश कर कागजी घोड़ों की दौड़ से पूर्णरूपेण आज़ादी दिला दे.  

लेखक : प्रकाश नारायण सिंह


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