Saturday, 25 February 2017

परिचय

कल , सुबह की सैर के बाद मैं अपने प्रिय पार्क की बेंच पर कुछ नैसर्गिक समय बिताने बैठ गया. आजकल रस्ते से एक अखबार भी उठा लेता हूँ. हेडलाइंस देखने तक ब्रीथिंग नार्मल हो जाती है. उसके बाद 10 मिनट प्राणायाम और उतने ही देर व्यायाम. बसंत के आगमन के साथ सुबह बड़ी सुहावनी होती जा रही है. आज कुछ ज्यादा ही लोग थे पार्क में. दो जन मेरे बेंच पर भी आकर बैठ गए. कुल छ महानुभावो की टोली थी. अपनी बातों में उनलोगों ने मुझे भी शरीक कर लिया गोकि आँख मिचौली कुछ दिनों से संघोष्टि में शामिल करने के लिए चल रही थी. सभी सरकारी नौकरी से अवकाश प्राप्त आईएस और आईपीएस अधिकारी थे . एक प्रोफेसर भी थे.

प्रोफेसर मेरी बगल में बैठे थे. सिलसिला उन्होंने शुरू किया. पार्क में काफी मात्रा में प्लास्टिक की खाली बोतलें और नमकीन के रैपर्स बिखरे पड़े थे. उनका कहना सही भी था. अँधेरा होते ही पार्क में मनचले लड़कों का जमावड़ा हो जाता है. उनकी कारीगरी बिखरे फैले कचरे से बखूबी हो जाती है. लगता था कि सोसाइटी का पार्क प्रशासन इस गन्दगी से बेखबर था.

आज मेरा उस टोली से पहला सामना था. जाहिर है मैं कुछ बेहतर हल देकर स्वयम को साबित करना मुनासिब समझ रहा था. वे लोग भी मेरी प्रतिक्रिया आंकने को बेताब दिख रहे थे. मेरा पर्यावरण मैनेजमेंट का अनुभव उकसाने लगा. मैंने सुझाया कि ये मसला तो आनन-फानन में दुरुस्त किया जा सकता है. हम सात जन पार्क के एक सिरे से शुरू करते है और कचरा चुनते हुए एक बैग में रखते हुए दूसरे किनारे तक पहुँच जायेंगे. सभी महाशय सन्नाटे में आ गए. मैंने इस प्रक्रिया को सेहतमंद भी बताया. सभी जन 20-25 बार झुकेंगे और 100 मीटर चलेंगे. सेहत पर अच्छा असर पड़ेगा. मैंने यह भी बताया कि ऐसा मैंने पूना में बुजुर्गों को बायोडाइवर्सिटी पार्क, पाषाण में नियमित रूप से करते देखा है.

उनमें से किसी को भी यह परामर्श नहीं भाया. लोग तरह-तरह के बहाने बनाने लग गए. सोसाइटी टैक्स लेती है, कचरा छूने से बीमारी होने का खतरा रहेगा, वगैरह. फिर बात सड़क पर बेबाक थूकने से लेकर ट्रेन में मनचले लड़कों की आवारगी और बत्तमीजी पर होने लगी , उसके बाद लालू के चलते प्रांत की जगहंसाई और उसके बाद धोनी के चलते मिली प्रतिष्ठा पर चर्चा होने लगी.

आज मैं 15 मिनट ज्यादा ही रुक गया था. नमस्कार कर घर की ओर चला. पार्क से बाहर निकलते ही पार्क का केयरटेकर दिख गया. मेरा गुड मोर्निंग उसे बहुत भला लगा. मैंने पार्क की ज्वलंत समस्या बतायी. उसने पार्क की त्वरित सफाई का गर्मजोशी के साथ आश्वासन दिया.

आज सुबह मैं थोड़ी जल्दी पहुँच गया. पार्क से सब कचरा ही नहीं साफ़ किया गया था बल्कि जंगली घास और झाड भी हटा दिए गए थे साथ ही जॉगिंग ट्रैक जगमग कर रहा था. मैं टोली के सदस्यों के आने से पहले ही पार्क से बाहर निकल थोड़ी दूर पूरब के छोटे पार्क में कुछ बेहतर समय बिताने बढ़ गया.





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