Wednesday, 20 May 2015

टू किल अ मोकिंग बर्ड !

“Before I can live with other folks I’ve got to live with myself.”

बहुत दिनों से मन बना रहा था हार्पर ली की लिखी क्लासिक "टू किल अ मॉकिंग बर्ड" पढ़ने का । आज उसपर पुरस्कृत फीचर फ़िल्म का वीडियो मिल गया यूट्यूब में ।
मॉकिंग बर्ड नॉर्थ अमेरिका में बहुतायत में दीखते हैं । ठीक गोरैया जैसे पर ज्यादा स्लीक और लंबे पूंछ वाले ।  40 से ज्यादा आवाजों के धनी । कोयल जैसी मिठास से लेकर कैमरे की क्लिक और मोटर की गडगडाहट तक । मतलब यह कि जो भी आवाज़ सुनी उसे हुबहू नक़ल कर लेना । अपनी जादूभरी आवाज  से यह मौसम में मादा को रिझाता है । इस किताब का नाम मॉकिंग बर्ड पर क्यूँ है यह तो पूरी फिल्म देखने के बाद ही पता चला । इससे सटीक टाइटल इस किताब की हो ही नहीं सकती थी ।
पेशे से वकील फिंच अपने लड़के जेम उम्र 10 वर्ष और लडकी स्काउट उम्र 6 वर्ष के साथ साउथ अमेरिका के अलबामा के एक कसबे मेकोम्ब में रहता था । 1933 के आर्थिक डिप्रेशन का असर पूरे अमेरिका में था । उसपर एक नीग्रो लड़के को निर्दोष साबित करने की कोशिश उसे पूरे कसबे का दुश्मन बना देती है । उस किशोर पर एक गोरी लड़की पर एडवांटेज लेने का झूठा संगीन आरोप था.। शायद वह उस लड़के को बचा भी लेता पर उसके पहले गोरों ने उसे मार दिया । उसके कातिल ने फिंच के बच्चों को भी मारने की कोशिश की । समय पर उनके  पडोसी रडले ने बच्चों को बचाया । इसके लिए उसे उस कातिल को मारना पड़ा । रडले अकेले एक भुतहा मकान में रहता था । उससे बच्चे बुरी तरह डरे रहते थे ।  शेरिफ पूरे वाकये से वाकिफ था । वह वहां के लोगों का मिजाज जानता था । इसलिए उसने कातिल को अपने चाक़ू पर गिरकर मरने का रिपोर्ट दर्ज किया । पर फिंच को कुछ ठीक नहीं लग रहा था । उसे उसकी बच्ची ने बखूबी समझाया ।
फिंच के अचूक निशाने से पूरा शहर वाकिफ था । फिंच ने स्काउट को बताया कि वह बेकाबू जानवरों और हिंसक क्रिमिनल्स को निशाना बनता था जैसा उसने उस दिन पागल कुत्ते को मारने के लिए किया था । पूछने पर कहा कि मॉकिंग बर्ड का तो कभी नहीं क्योंकि वह किसी का नुकसान नहीं करती है बल्कि तरह-तरह के गाने गाकर माहौल को खुशनुमा रखती है । स्काउट ने कहा कि रडले भी उसी मॉकिंग बर्ड की तरह है । लोग तो मिठाई के साथ नफरत और फूल के साथ बिमारी लाते हैं , रिडले तो वैक्स के खिलौने बिना दिखे देता है 
रिडले के बदरंग जीवन में भी बहार आ गयी । उसे दो प्यारे बच्चों का साथ मिल गया । बच्चों को भी तभी मालूम पड़ा कि पेड़ के खोखड में समय-समय पर खिलौने वगैरह कौन रख जाता था । कलतक रिडले जो एक भूत था और उसका भुतहा मकान जहां बच्चे जाने से डरते थे अब एक मस्त मस्ट खेलने की जगह बन गयी थी
मेरा प्रिय एक्टर ग्रेगोरी पेक फिंच की भूमिका में बहुत जंच रहा था । पर जिसने मन मोह लिया वह थी मैरी बद्हम 6 वर्षीय जीन ( स्काउट) की भूमिका में । क्या खूब निर्देशक रोबर्ट मुलिगन ने बच्चो से एक्टिंग कराई है । स्काउट के बड़े भाई जेम में मुझे अपना बचपन दीखता है । मैं आज की सभी लड़कियों से स्काउट जैसा करैक्टर और कंडक्ट की आशा रखता हूँ । खैर फिंच जैसा तो मुझे भी बनने की अभिलाषा थी । इस किताब और इसपर बनी फिल्म की सफलता का राज भी यही है । मेरे जैसे कई लोग जरूर सोचते होंगे कि बड़ी होने पर स्काउट कैसी होगी  बेसब्र न हों, हार्पर ली भी यही सोच रही थीं  उनकी अप्रकाशित किताब " सेट अ वाचमैन" व्यसक स्काउट पर ही है  
 

Atticus Finch: If you just learn a single trick, Scout, you'll get along a lot better with all kinds of folks. You never really understand a person until you consider things from his point of view... Until you climb inside of his skin and walk around in it.









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