Wednesday, 3 June 2015

दिल की बातें !





हाल में, मैंने दो मजेदार लेख पढ़े. दोनों वृद्धावस्था पर थे. पहले का शीर्षक ही मनोहारी था- "It Takes a Village". लेखक ने दुनिया के आठ जगहों का अन्वेषण किया जहा 100 वर्ष या उससे ज्यादा के लोग बहुतायत में हैं. ये जगहें ज्यादातर गाँव या छोटा क़स्बा था. कहीं पर ग्रीन टी, कहीं पर मछली, कहीं पर हरी शाक-सब्जियाँ तो कहीं पर बियर कारण बने ज्यादा उम्र के. पर सब जगह कुछ बातें कॉमन मिलीं, जैसे स्वच्छ और हरा-भरा पर्यावरण एवं लोगों का ज्यादा-से-ज्यादा सोशल रहना. दिनभर में तीन-चार बार तो मिलने का बहाना दूंढ ही लेते है और अगर कोई बीमार पड़ गया तो वहीँ डेरा-डंडा. जादू की झप्पी की भी भरमार. सार्डिनीया (इटली) ने सबसे ज्यादा सेंचुरी ठोकी थी, कुल 10000 में 21 जबकि अमेरिका में मात्र 4.

मेरे इस ररिहायशी जगह की हरियाली और रख-रखाव एक नम्बर की है, इसीलिये इसे गार्डन स्टेट के नाम से पुकारा जाता है. मोर्टेलिटी रेट भी अव्वल दर्जे की है. लोगबाग भी खुशमिजाज हैं. इसलिए पहले लेख का सबूत तो सामने दिख गया.

दूसरा लेख उससे भी ज्यादा जीवंत पर था अवसादी. शीर्षक था “Why Retirees Should Shed Friendships That No Longer Fit”. पुराने दोस्त पुरानी बातों, वाकयों में ही उलझे रहते हैं जो मनोरंजन कम अवसाद(डिप्रेशन) ज्यादा लाता है. नयी दोस्ती में नयापन, नयी बातें ज्यादा रहेंगी जो स्वास्थ्यवर्धक हैं. नयी दोस्ती और नयापन वाली बात तो समझ में आती है पर पुराने दोस्त- पुरानी बातों वाली मुझ अल्हड को अजीब लगी.

यहाँ, नयी जगह में, मैंने भी एक नयी दोस्ती बनायी है. डॉ. बालसुब्रमनियम इसरो के रिटायर्ड वैज्ञानिक हैं. उनसे सभी बातें ज्यादातर वर्तमान काल की होती हैं, जैसे राकेट साइंस, एलीमेंट्री पार्टिकल्स, स्टेफेन हाकिंग, पाउडर मेटलरजी, मौसम वगैरह. अच्छा लगता है, खासकर अपने दोस्तों को बताने में.

मैं और मेरे बचपन के दोस्त, रिटायरमेंट के बाद, पिछले पांच वर्षों से रूबरू, फ़ोन पर या विडियो मीडिया पर पुरानी बातों को कुरेद-कुरेद कर घंटों बातें करते हैं और इसी भ्रम में हैं कि हमलोग एक-दूसरे को ज़िंदा रखे हुए हैं. बात बिलकुल गलत भी नहीं है. पर नयेपन कि तो हम सभी को तलाश है. बच्चों को समय नहीं, बच्चों के बच्चों के पास खेलने के लिए विशाल भण्डार है. आउटडोर के अलावा इनडोर भी. यहाँ तक कि हमलोगों की लाइफ-लाइन लैपटॉप भी इन बच्चों से आतंकित है.

आज, मैंने सोचा कि अपना अनुभव अपने पुराने दोस्तों को छोड़ने के बजाय उनसें बांटकर अपनी आदतों में नयापन ले आयें. इसी कर्म में मैंने अपने एक मित्र को फ़ोन किये. उसे मेरा अनुभव बहुत अच्छा लगा. उसने मुझे भरोसा दिलाया कि वह भी अब पुरानी बातों से परहेज करेगा. और उसने एकदम नयी बात छेड़ दी. अभी कल ही उसकी भेंट अपने पुराने सहयोगी से हुई थी. वह प्रिंसिपल हो गया है और उसका पूरा श्रेय वह मेरे मित्र को देता है जिसने उसे पीएचडी करने को प्रोत्साहित किया. बात 1993 की थी. ......... पूरे आधे घंटे तक वह उन पुरानी बातों को दोहराता रहा. लगता है, कुछ और बैठकों के बाद बात बने.मेरे दूसरे मित्र ने तत्काल बालसुब्रमनियम से फेसबुक पर दोस्ती कर ली है. आज उसने फ़ोन पर घर के सामने शोर्ट सर्किट से लगी आग का आँखों देखा हाल बताया. मुझे मेरे दोस्तों की यही फितरत रास आती है.

विकसित(डेवलप्ड) जगहों पर पुराने सामान की मरम्मत नहीं होती है बल्कि तुरत उससे बढ़िया लेटेस्ट सामान लेकर पुराने को फेंक दिया जता है. रिश्तों के साथ भी शायद यही हो रहा हो. शायद उसी का साइड इफ़ेक्ट हो दोस्तों को बदलने की सिफारिश.

बहुत पहले मैंने एरिक सेगल की “लव स्टोरी” पढी थी. उसकी सबसे उम्दा लाइन मानी जाती है “Love means never having to say you're sorry.” आज अचानक मुझे इस लाइन की याद क्यों आ गयी. मैंने इसका अर्थ समझने के लिए बहुत से ब्लॉग पढ़े. मालूम नहीं आज के ये लोग इतनी अच्छी बात भी लिखते हैं और दूसरी तरफ पुरानी दोस्ती को दरकिनार करने की भी बात करते हैं. ये लोग पुरानी चीजों को एंटीक और विंटेज का लेबल लगाकर बेशकीमत बनाने में नहीं हिचकते और घर में खास जगहों पर सजाकर रखते भी हैं दिखाने के लिए. अब नाते-रिश्तों के साथ तो ये सब नहीं किया जा सकता. हाँ , चाहे तो फिजिकल साइंस की कसौटी पर कस लें इनकी तरंग(वाइब्रेशन). ये वाइब्रेशन ही तो है जो रेसोनेट करती है, दोस्ती में और प्यार में ! कमाल है , हमलोग अपने इतिहास पर गौरव करते हैं दोहराते रहते है, ताजमहल और स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी को ताजगी देते रहते हैं यहाँ तक कि अपने बरसों पुराने धर्म और मजहब से चिपके रहते हैं और हाँ पुरानी शराब और बासी कवाब की शौकीनी करते हैं पर दोस्ती को पुराने कपड़ों की तरह बदलना चाहते हैं. कभी अपने दोस्तों के दिल का भी हाल जानिये कि वे क्या चाहते हैं या फिर  " Friendship means never having to yearn to know.”

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