Wednesday, 22 April 2015

खट्टा मीठा !

तड़के 6 बजे नेवार्क एअरपोर्ट से बाहर निकलते ही बारिश और तेज ठंडी हवा ने सहमा दिया । जब कोई रिसीव करने वाला न दिखा तो भारी बैगेज के साथ वही खुले बेंच पर हमलोग सिमट गए । न तो मैं इंटरनेशनल रोमिंग से लैस था और न एअरपोर्ट पर फ्री वाई-फाई की सुविधा ही थी इसलिए इन्तजार के सिवा कोई चारा नहीं दिख रहा था । आधे घंटे बाद मैं नर्वस होने लग गया क्योंकि हर बार मुझे लोग पहले से मुस्कुराते हुए स्वागत करते मिले थे ।
मैं फोनबूथ खोजते अंदर लॉबी में आ गया । सामने कियोस्क दिखा । मैनेज करती एक भारी भरकम ब्लैक महिला ने काफी मशक्कत के बाद और पानी की बोतल खरीदने के बाद ही  पेपर डॉलर के बदले में सिक्कों का चेंज दिया और बूथ का लोकेशन बताया ।
बूथ पर नम्बर डायल के बाद एक क्वार्टर डॉलर डालने की हिदायत आयी । मेरे पास क्वार्टर डॉलर के चार सिक्के थे  जिसे वहां लगे चारों में से किसी बूथ का स्लॉट मंजूर नहीं कर रहा था । शायद कोई बटन या लिवर इस्तेमाल करना हो जो मैं समझ नहीं पा रहा था । कुछ दूर खड़े बतियाते दो जहीन दिखते युवकों से मदद मांगी । उन्होंने मुझे " help yourself" की सलाह दी और बतियाने में मशगूल हो गए ।
मुझे सीढ़ी से उतरते एक 20-22 साल का लंबा ब्लैक युवक दिखा ।शायद स्वीपर था । मैंने उसको अपनी तकलीफ बतायी । उसने अपना सेल निकाला , मुझसे कांटेक्ट नम्बर पूछा, डायल किया और रिंग टोन आते ही मुझे सेल थमाकर अपने काम में व्यस्त हो गया ।
कोई एक मिनट अपनी बेटी से बतिया कर जब मैंने सेल सधन्यवाद  वापिस करने के लिए नजर दौड़ायी तो वह युवक कहीं दिखा ही नहीं । वह आया 3-4 मिनटों बाद । उसने "आल सेट" पूछा । बहुत हौले से मुस्कुराते हुए मेरा धन्यवाद स्वीकारा और वापिस अपने काम की और निकल गया ।

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