३ महीने से पूरा परिवार पांच वर्ष के साईं को सभी काम खुद करने को बाध्य करता रहता था. आज वह स्विंग(झूले) पर खुद उछल कर बैठा और काफी ऊंची पेंग लगाने लगा. मैंने सभी को एक बार फिर खबरदार किया कि जिसे भी साईं को हाथ से कौर बना-बनाकर खाना खिलाने का और वैसे ही और बहुत से मजे लेने हों, जल्दी जल्दी ले लें, क्योंकि अब साईं बहुत से अवसर नहीं देने वाला है.
अब न तो वह देर तक नाश्ता और खाना लेकर इन्तजार करेगा कि कोई उसके पास बैठे और उसे खिला दे और न तो बाकि कामों में टाल-मटोल करेगा. अब तो वह झटपट खाकर मस्ती करने का मौका नहीं खोना चाहेगा. अब तो उसे कितना कुछ करने को दिखता रहेगा. बढती उमर है अब उसके ज्यादा खाने पर परेशान नहीं होना है. आखिर यही तो सभी कोई कितने दिनों से कोशिश कर रहे थे.
झूले पर बिठाने और धक्के देकर पेंग बढाने का काम ज्यादातर मैं करता था.
आज बहुत ख़ुशी भी हुई और .....
आज बहुत ख़ुशी भी हुई और .....

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