Tuesday, 31 March 2020

आ अब लौट चले !

2-3 दिनों से सोशल मीडिया पर तरह-तरह के चमत्कार देखने को मिल रहे हैं। दिल्ली की सड़कों पर नीलगाय दौड़ रही है। हरिद्वार में हरिणों का झुंड
दिख रहा है। अहमदाबाद में मोर छत की मुडेड से उतर कर सड़क पर विचरण करने लग गए हैं। दिल्ली के प्रदूषण स्तर में जादुई सुधार आया है। आकाश फिर से नीला दिखने लग गया है।

रांची में आकाश और भी नीला दिख रहा है। चिड़ियों के कलरव की मधुरता सुनाई दे रही है। आम के पेड़ में मंजर तो पहले भी आता था पर इस बार उनमें ज्यादा नशीली सुगंध है। सबसे अच्छी बात तो यह है की एक ही बाड़े में रहने वाले सगे-संबंधी साथ बैठते और बतियाते हैं। मेरे छोटा भाई अब फिर से गीत गाने लगा है और वह स्टारमेकर एप्प पर काफी लोकप्रिय हो रहा है।

इस समय छत पर बैठ कर वातावरण से रुबरु होना बहुत प्रिय लग रहा है। आज थोड़ी ज्यादा गर्मी थी। जल्दी ही चाय लेकर छत पर बैठकी लगाने चल गया। पहले एकदम काली, गोरैया से भी छोटी चिड़िया मुडेड पर कुछ देर के लिए बैठकर तुरंत उड़ गई । उसमें अभी विश्वास की कमी है। वह तो
हमलोगों में भी है। उसके बाद लंबी पूंछ लिए हल्दी पेट वाली मैना जैसा जोड़ा सर के ऊपर से गुजर गया । 20-25 वर्षों बाद नीलकंठ भी कुछ देर दूर पेड़ पर आकर बैठा। शायद नीलकंठ ही था। यह सब में अपने मित्र को फोन पर बता ही रहा था की सबसे अंत में एक मैना से भी छोटी बिलकुल सफ़ेद चिड़िया पड़ोस के एसबेसटस के छत पर चुगते फोटो खिचने को तैयार मिली।
कल से सुबह आधे घंटे पहले से बैठूँगा। जो भी हो रहा है वह एक प्राकृतिक संदेश मिलता जैसा प्रतीत हो रहा है.

1 comment:

  1. हाँ सुबह पाँच बजे से मधुर स्वर शुरू होता है और अब तो फ़ुरसत हो तो दिन भर सुनते रहिए - देखते रहिए

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