BBC को एक इंटरव्यू देते वक्त
जावेद अख्तर से जब उनके पसंदीदा गीतकार के बारे में तब उन्होने कहा –
“ देखिए, जैसे गीतकार उस ज़माने में थे आज तो हम सोच भी नहीं
सकते. साहिर, शैलेन्द्र, मज़रूह, कैफ़ी, एसएच बिहारी. राजा मेंहदी अली, प्रदीप, भरत व्यास....इन सबमें मुझे साहिर बहुत पसंद थे.
उन्होंने सिर्फ़ कमाई के लिए गाने नहीं लिखे. उनकी किसी भी फ़िल्म का गीत सुनिए, एक-एक लाइन ढली हुई है.
दूसरे जीनियस थे शैलेन्द्र. दरअसल, शैलेन्द्र का रिश्ता बनता है कबीर और मीरा से. बड़ी
बात सादगी से कह देने का जो गुण शैलेन्द्र में था, वो किसी में नहीं था. यहाँ तक कि ‘गम दिए मुस्तकिल’ से लेकर ‘आज मैं ऊपर आसमाँ नीचे’ जैसे गाने लिखने वाले मज़रूह साहब ने एक बार खुद
मुझसे कहा था कि सच पूछो तो सही मायनों में गीतकार शैलेन्द्र ही हैं.
शैलेन्द्र का रिश्ता उत्तर भारत के लोक गीतों से
था. लोक गीतों में जो सादगी और गहराई होती है वो शैलेन्द्र के गीतों में थी. ‘तूने तो सबको राह दिखाई, तू अपनी मंजिल क्यों भूला, औरों की उलझन सुलझा के राजा क्यों कच्चे धागों में
झूला. क्यों नाचे सपेरा’.
अगर क्यों नाचे सपेरा जैसी लाइन मैं लिख पाऊँ तो
इत्मीनान से जीऊँगा.”
ने “क्यों नाचे
सपेरा” का अर्थ यों लगाया – “ संपेरा और सांप का रिश्ता भी लहरदार होता है। एक
संपेरे को प्रेम हो जाता है और बड़ी परेशानी के बाद विवाह हो पाता है। सुहागरात को
उसकी प्रिय सर्पिणी उसे काट लेती है। वह लंबे समय से उसका विष नहीं निकाल पाया था।
प्रेम में डाह भी होती है। विजय आनंद की ‘गाइड’ में शैलेन्द्र के लिखे एक गीत में पंक्ति है- ‘आज क्यों नाचे संपेरा।’ शैलेन्द्र ने बड़ी गहरी बात की है, जिसका तात्पर्य यह है कि अवाम सपेरा है परंतु आज वह
मंत्रमुग्ध होकर नाच रहा है। “
गाइड श्री आर के नारायण की पुस्तक का फिल्मीकरण था।
फिल्म का नायक एक गाइड है। गाइड ज़्यादातर इतिहास और ऐतहासिक स्थानों का विशेषज्ञ
होता है। वह पर्यटकों के हरेक प्रश्न का समाधान करता है। राजू गाइड अपने व्यवसाय
के अतिरिकित कुछ ज्यादा ही चालाक था। वह उत्तर गढ़ भी लेता था। पर्यटकों के हरेक
मुश्किलों का उसके पास सरल और सुगम समाधान होता था।
कैसे उसने एक विवाहित नृत्यांगना से मित्रता की, प्रेम किया, उसके पैसों
से ऐश किया , धोखेधड़ी के मामले में जेल गया और
सबकुछ खोकर जेल से बाहर आया – यहीं से राजू गाइड में एक
साफ-सुथरा मोड आता है। “मुसाफिर तू जाएगा कहाँ “ राजू को
उसकी आगे की यात्रा की ओर अग्रसर करने का थीम सॉन्ग है।
राजू वह सपेरा है जो औरों को नचाते-नचाते स्वयं
नाचने लगा था ।
No comments:
Post a Comment