डॉक्टर सरकार एक वरिष्ठ श्वास संबंधी विशेषज्ञ हैं। उनके असिस्टेंट से मैंने दो
दिन पहले ही अपॉइंटमेंट ले लिया था। आज सुबह से ही मुझे अस्थमा की तकलीफ बढ्ने
लगी। इतना की बार–बार इन्हेलर लेना पद रहा था। किसी तरह एक बजे दोपहर को 2-3 ऑक्सिजन
का पफ़ लेकर ओला कर डॉक्टर के क्लीनिक पहुँच गया। काफी भीड़ थी, कोई भी बैठने की जगह नहीं दिख रही थी। दूसरे कमरे से लाकर मेरे लिए कुर्सी रखी
गई दरवाजे के पास।
डॉक्टर 2 बजे आए। डॉक्टर हरेक मरीज को 20 से 30 मिनट देते हैं। मेरा नंबर 10 था।
इस तरह मुझे 5 घंटे तो अवश्य लाग्ने थे। लगभग 4 बजे मेरी उम्र का एक मरीज बुरी तरह
हाफते हुए 2 लोगों का सहारा लेकर दाखिल हुआ। लंबी दाढ़ी भी बुरी तरह काँप रही थी। जगह
तो थी नहीं, वह चारो तरफ देखकर हताश होकर दरवाजे के सहारे खड़ा हो
गया। मेरी तबीयत उससे बेहतर थी। मैंने खड़े होकर उसे बैठा दिया और कॉरिडॉर का चक्कर लगाने
निकाल पड़ा। लगभग 15 मिनट बाद दाखिल हुआ। तभी डॉक्टर ने उस मरीज को बुला लिया।
अभीतक डॉक्टर 4 मरीज़ ही देख पाये थे। इस तरह
मेरा नंबर आने में 3 घंटे अवश्य लगने वाले थे। कुर्सी पर बैठते ही थोड़ी देर बाद मुझे
झपकी आ गई । अचानक मेरी बुलाहट हुई। वह मुस्लिम मरीज बाहर निकाल रहा था। वह हाँफ भी
नहीं रहा था। अवश्य उसे नेबुलाइज़र दिया गया होगा। वह मुझे आशीष देते हुए मेडिसिन स्टोर
की तरफ चला गया । मैं डॉक्टर के कमरे मे दाखिल हुआ। जांच के बाद ब्लड सैंपल देने पड़ोस
के लाल पैथ लैब चला आया।
अवश्य डॉक्टर को असिस्टेंट या उस मरीज ने कुछ कहा होगा नहीं तो इतने जल्दी वह नहीं
बुलाते या फिर “हरि कृपा अनंता“।
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