Wednesday, 27 July 2016

सरकार भ्रष्ट नहीं है, भ्रष्टाचार के लिए सरकार है !


आज मैंनेमदारीफिल्म देखी अच्छी थी इरफ़ान खान पर ऐसी कहानियां फब्ती हैं जिनमें बड़ी-बड़ी तीखी आँखों का खेल हो कहानी बस यही कहने को बनी थी – “सरकार भ्रष्ट नहीं है, भ्रष्टाचार के लिए सरकार है
मैंने ऐसा अनुभव किया है की जब भी इस तरह की सच्चाईओं का मीडिया में पर्दा फाश होने लगता है, लोग और ज्यादा निडर हो जाते हैं ये बात अश्लीलता और फूहड़पने तक की ही नहीं है बल्कि सभी कुछ के लिए है भ्रष्टाचार पर पहले भी कई सशक्त फ़िल्में बनी हैं जागते रहो और श्रो 420 , 1950 के दशक की फ़िल्में थीं तब भ्रष्टाचार की शुरुआत थी आज के दिन ईमानदारी का जनाजा गली-सड़कों पर तमाशा बना हुआ है
अब अगर हम मान लें कि सरकार भ्रष्ट नहीं है, भ्रष्टाचार के लिए सरकार है तब बाकी क्या बचता है ये जुमला किसी भी गलत बात के लिए बोला जा सकता है जैसे मनुष्य नंगा नहीं है, नग्नता मनुष्य के लिए बनी है असत्य बोलने के लिए मनुष्य है, कमजोर को तकलीफ देने के लिए सक्षम हैं, गरीबों को सताने के लिए अमीर हैं वगैरह
तीन तयशुदा बातें हैं जो कुछ देशों को बहुत हद तक भ्रष्टाचार मुक्त बनाती हैं न्यूजीलैंड, फ़िनलैंड, डेनमार्क और स्वीडन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चौक-चौबंद कानून व्यवस्था  के अलावे पारदर्शिता और जनता की भागेदारी पर अत्यंत बल दिया जाता है“Right to Information” बुनियादी है इन देशों में साक्षरता शत-प्रतिशत है और हाँ, आबादी बहुत कम है नेताओं और सरकारी नौकरों के रहन-सहन पर पूरी नजर रखी जाती है डेनमार्क में तो नेताओं को अपने पर किया गया खर्च, गिफ्ट, टूर इत्यादि का पूरा ब्यौरा देना पड़ता है
भारत देश में इसका ठीक उल्टा है सबसे अमीर नेता लोग ही हैं उनसे क़ानून भी डरता-सहमता है
भारत देश में आबादी और निरक्षरता आड़े जाती है फिर भी हम डेनमार्क जैसा कुछ शुरुआत तो कर ही सकते हैं जिससे भ्रष्टाचार की गति में कमी आने लगे जैसे:
  1. बजट की पूरी-पूरी जानकारी और उसके खर्च पर जनता की नजर
  2. सरकारी नौकरों और नेताओं के लिए एक सशक्त कोड ऑफ़ कंडक्ट जैसा डेनमार्क में है
  3. भ्रष्टाचार की पहचानी गति-विधियों पर कानूनी पकड़
सरकार भ्रष्ट नहीं है, भ्रष्टाचार के लिए सरकार है तो फिर सरकार भी तो नागरिकों  के द्वारा , नागरिकों के लिए , नागरिकों की है ।



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