सत्यकाम(1969) को निर्देशक ऋषिकेश मुख़र्जी अपनी सबसे अच्छी फ़िल्म मानते हैं। अनाड़ी( राज कपूर), आनंद और बावर्ची(राजेश खन्ना) जैसी नायाब फ़िल्म बनाने वाले से इससे अच्छी प्रसंशा और क्या हो सकती है। सत्यकाम, कहानीकार: नारायण सान्याल, कलाकार : अशोक कुमार, संजीव कुमार, शरमीला टैगोर, डेविड, रोबी घोष, धर्मेन्द्र, कहानीकार : राजिंदर सिंह बेदी जैसे बेमिसाल शिल्पियों की देन है। नायक धर्मेन्द्र ने अपने जीवन की सबसे अच्छी भूमिका निभाई है।
इस फ़िल्म को सबसे अच्छी फ़िल्म और संवाद के लिए 1971 का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला ।
फ़िल्म ऐसे सिविल इंजीनियर की कहानी है जो सत्य और ईमानदारी के लिए किसी स्थिति पर समझौता नहीं करता वह भी उस समय आज़ादी के बाद जब देश तेजी से भ्रष्टाचार के दलदल में धंसता चालक जा रहा है। जिन्हें सत्य पर चलने का अहंकार था , नायक के कट्टर रूढ़िवादी दादा को, वे भी अंत सत्य पर चलने का साहस कर पाये ।
पर तब के माँ- बाप अपने बच्चों को ऐसी फ़िल्म देखने के लिए उत्साहित करते थे । आजकल मना करते है । बच्चा बिगड़ जायेगा ! स्वयं फ़िल्म को अपनी करतूतों पर एक करारा तमाचा मानते हैं।
इस फ़िल्म को सबसे अच्छी फ़िल्म और संवाद के लिए 1971 का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला ।
फ़िल्म ऐसे सिविल इंजीनियर की कहानी है जो सत्य और ईमानदारी के लिए किसी स्थिति पर समझौता नहीं करता वह भी उस समय आज़ादी के बाद जब देश तेजी से भ्रष्टाचार के दलदल में धंसता चालक जा रहा है। जिन्हें सत्य पर चलने का अहंकार था , नायक के कट्टर रूढ़िवादी दादा को, वे भी अंत सत्य पर चलने का साहस कर पाये ।
पर तब के माँ- बाप अपने बच्चों को ऐसी फ़िल्म देखने के लिए उत्साहित करते थे । आजकल मना करते है । बच्चा बिगड़ जायेगा ! स्वयं फ़िल्म को अपनी करतूतों पर एक करारा तमाचा मानते हैं।

No comments:
Post a Comment