Friday, 2 November 2018

सद्दा हक ऐथे रख !


एक सुबह जब मैं सैर के बाद घर लौटा तो दरवाजे के सामने जमीन पर चाक से लिखा पाया- “ माँ ! मुझे बहुत ज़ोर भूख लगी है। “  पिताजी  के घर के उत्तर पश्चिम कोने पर मैंने छोटा सा घर बनाया है जहां मैं अवकाश प्राप्त करने के बाद रहने लगा हूँ। दक्षिण-पश्चिम कोने पर बने घर में 3 परिवार पलता है। पति-पत्नी घर के रोज़मर्रा कार्यों में मदद कर देते हैं । एवज में उन्हे रहने की जगह मिल गई है । बच्चे इंग्लिश मीडियम में पढ़ते हैं और पढ़ने में काफी तेज हैं।  सैर से लौटने का इंतजार घर के पालतू कुत्ते इंतजार करते मिलते हैं। इन्हें मैं एक-एक ब्रैड की स्लाइस खिलाता हूँ। रोवर बूढ़ा हो गया है। उसके दाँत नहीं हैं। उसे मैं ब्रैड भिंगाकर मुलायम कर खिलाता हूँ।

अगले दिन मैं एक बिस्कुट का 2 छोटा पाकेट खरीद लाया। सभी बच्चे बहुत स्वाभिमानी हैं। इस कारण मैंने वह पाकेट सबसे छोटे बच्चे को दे दिया । मेरे कहे अनुसार उस बच्चे ने सभी के साथ बाँट कर बिस्कुट खाया। अगली सुबह से वह बच्चा इंतजार करता मिला।  शायद दिनभर मे मैं एक यही काम करता था जिससे मुझे संतुष्टि मिलती थी। इतनी की अगर पैसा कम पड़ जाये तो मैं अखबार नहीं खरीदता था। ऐसा निरवरत 2 वर्षों तक चला।
बच्चों ने बस एक गलती कर दी। वे श्रीमती को देखा-अनदेखा करने लग गए।इसका एक प्रबल कारण यह भी था की वो उन बच्चों से शिक्षिका जैसा व्यवहार करती थी।   एक दिन श्रीमती ने मुझे बिस्कुट देने से मना कर दिया। उनका कहना था की बच्चे उनसे बत्तमीजी करते हैं। मुझे दुख तो बहुत हुआ। उस छोटे बालक को मैंने यह कहकर फुसला दिया की अब वह बड़ा हो गया है बच्चा नहीं रहा। पर सुबह उसकी आंखे मुझसे पूछती जरूर थी। मैं अब बहुत देर कर घर लौटता । तबतक बच्चे स्कूल जा चुके होते। कुछ महीने बाद बच्चों ने स्थिति से समझौता कर लिया। एक वर्ष बीत गए। मैं अब केवल कुत्तों को ब्रैड देता 
इधर कुछ दिनों से मैंने यह पाया की बच्चे श्रीमती को सुबह गुड मॉर्निंग और शाम को गुड ईवनिंग कहने लगें हैं। श्रीमती भी नियमित पूजा के बाद बच्चों को प्रसाद बाटना नहीं भूलती है। देखकर अच्छा लगा।
इस बार हमेशा की तरह दिवाली की सफाई में मैं भरपूर साथ दे रहा था। हमलोग छठ पर्व भी मनाते हैं। एक मीडियम साइज़ की आलमारी है। ऊपर के खानो में क्रॉकरी रखी जाती है। नीचे के दो खानों में आचार
वगैरह खाने का समान रखा जाता है क्योंकि इसका पल्ला लकड़ी का है और ठीक से बंद भी हो जाता है।  आज सुबह मैंने आलमारी साफ करने का जिम्मा लिया। नीचे का पल्ला खोलते ही मैं भौचक सा रहा गया । 2 झोलों में भरकर बिस्कुट का पाकेट रखा था । एकदम उतना ही बड़ा पाकेट जो मैं लाकर बच्चों को दिया करता था।



No comments:

Post a Comment