हमारी सोसाइटी में चार पार्क हैं. पहला सबसे बड़ा एकदम पूरब
में , दूसरा थोडा छोटा , ठीक बीचो-बीच सोसाइटी पार्क, तीसरा उत्तर में मंदिर पार्क
और चौथा पश्चिम में. सोसाइटी पार्क का सही रख रखाव है. दसियो सीमेंट के बेंच हैं.
जॉगिंग ट्रैक है. साथ में बच्चों के लिए अलग घेरा है. सोसाइटी पार्क में युवा
व्यायाम और जॉगिंग करते दिखेंगे. वरिष्ठ नागरिक टहलते, प्राणायाम करते और बतियाते दिखेंगे.
मंदिर पार्क को महिलायों ने हथिया लिया है. एक अच्छी सुबह की सैर के बाद पार्क में
बैठकर सुबह की हवा और धूप का आनंद लेते हुए प्राणायाम और थोड़ी वर्जिश करना बहुत
संतोष देता है. पहले मै तबियत की फुर्ती और बदलाव के अनुसार बारी-बारी सभी पार्क
जाता था. इधर कुछ दिनों से मुझे सोसाइटी पार्क ज्यादा आकर्षित करने लगा है.
अब दस वर्ष होने को आये. प्रायः सभी आगंतुकों को नाम, व्यवसाय और पसंद से जानने लगा हूँ . आश्चर्य इस बात का है कि अभी तक किसी से निकटता नहीं हो पायी है और न विचार विनिमय ही . मुझे मूक दर्शक बने रहना ही श्रेयस्कर लगता है. इसका कारण हीन या श्रेष्ठ भावना कतई नहीं है. किसी एक दिन अनुपस्थित होना नागवार गुजरता है. किसी एक की अनुपस्थिति अनमयस्क कर देती है. शायद ऐसा सभी पार्कगामी एक-दुसरे के बारे में सोचते हों. पार्क अब परिवार लगने लगा है.
अब दस वर्ष होने को आये. प्रायः सभी आगंतुकों को नाम, व्यवसाय और पसंद से जानने लगा हूँ . आश्चर्य इस बात का है कि अभी तक किसी से निकटता नहीं हो पायी है और न विचार विनिमय ही . मुझे मूक दर्शक बने रहना ही श्रेयस्कर लगता है. इसका कारण हीन या श्रेष्ठ भावना कतई नहीं है. किसी एक दिन अनुपस्थित होना नागवार गुजरता है. किसी एक की अनुपस्थिति अनमयस्क कर देती है. शायद ऐसा सभी पार्कगामी एक-दुसरे के बारे में सोचते हों. पार्क अब परिवार लगने लगा है.
सबसे मुखर बैठक पुलिस वालों की होती है. सभी 65-70 आयु वर्ग
के अवकाश प्राप्त हैं. चौधरी जी सबसे ज्यादा मुखर है. नोटबंदी के बाद घोर मोदी
विरोधी हो गए हैं. इतना की अपशब्द कहने से भी बाज नहीं आते. अच्छा मूड होने पर
रामायण और गीता के श्लोक भी सुनाते हैं. खान साहब बहुत हसमुख हैं और इनकी कोशिश
रहती है कि इन्हें भारतीय समझा जाये. चौधरी और खान DSP थे .पाण्डे जी हाई कोर्ट के
रजिस्ट्रार थे. इनका ज्ञान भण्डार अच्छा है और उसे बांटने में कोई हिचक नहीं
दिखाते. सिंह जी SP थे और इनका आगमन सबसे बाद में होता है. सभी खड़े होकर इनका
अभिवादन करते हैं. सामयिक विषय ही चर्चा का केंद्र होता है.जब वार्तालाप ज्यादा
गरमाने लगता है तब सिंह जी हस्तक्षेप करते हैं अन्यथा वे ज्यादातर शांत ही रहते
हैं. पार्क में एक-दो जन बेबस इस चौकड़ी की आकर्षित हो आती है. उनमें एक स्व-घोषित गाँधीवादी
भी हैं, पहनावे से भी. इनका प्रयत्न होता है वार्तालाप को गाँधी फिलोसोफी के तरफ
मोड़ ले जाना.
एक अवकाश प्राप्त प्रोमोटी IAS भी हैं. प्रसाद जी एक-दो बार
जॉगिंग ट्रैक पर चक्कर लगाकर कोई नया आसामी ढूंढते रहते हैं. मिल जाने पर उसके बगल
में बैठ कर परिचय का आदान-प्रदान करते है. उसके बाद शुरू हो जाते हैं- जब मैं फलां
जगह ADM था ....तो ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेते. एक-दो बार मुझपर भी जोर-आजमाईश
कर चुके हैं. मैं उन्हें देखते ही आँखें बंद कर ध्यानमग्न हो जाता हूँ. जब कोई
आसामी नहीं मिलता है तो थक-हार कर पुलिसिया बैठक में शामिल हो जाते हैं. कोई
सलाम-दुआ नहीं चुकी कोई किसी से कम नहीं. जारी प्रसंग को जबरदस्ती हथियाने के
चक्कर में बैठक टूट जाती है.
इन सभी के अलावा मेरी तरह मात्र प्राणायाम और योग से मतलब
रखने वाले 5-6 महानुभाव हैं. किसी का प्रयास दूसरे से मेल नहीं खाता. मैं रामदेव
का अनुयायी हूँ तो दूसरा श्री श्री का, कोई तीसरा विपासना या चौथा ईशा सद्गुरु का और
पांचवा किसी और का. मजा तब आता है जब हमलोग सभी एक-दूसरे को प्रभावित करने के लिए
प्रपंच करने लगते हैं.
एक और वयोवृद्ध दो वर्षों से आते हैं. निम्न आयवर्ग से कम
पढ़े लिखे. मेरे से पहला सामना होते ही उन्होंने हाथ जोड़कर मुझे नमस्कार किया.वैसा
वे सबसे साथ करते हैं चाहे वह २० वर्ष का युवा हो या मेरा जैसा वरिष्ठ. तबसे हम और
दूसरे भी उनका पहले अभिवादन करने में चूकना नहीं चाहते. कम सुनते हैं इसलिए मुझसे
तो ज्यादातर इशारों में बातचीत होती है. 26 जनवरी को हाथ में तिरंगा लेकर आये थे.
वह अपने बेटी-दामाद के घर रहते हैं. कुछ दिनों से दुखी हैं. छोटा-मोटा काम ढूंढ
रहे हैं.
इतनी खलबली के बीच एक दो लड़के-लडकी दुनिया से बेखबर, चक्कर
लगाते या सुनसान बेंच पर बैठते, मोबाइल पर बतियाते, लाजवाब होते रहते हैं . कुछ बुजुर्ग
नर-नारी ऐसे भी हैं जो चुपचाप अपने भरसक भरपूर चक्कर लगाकर घर लौट जाते हैं. पक्षी
सुबह का भरपेट नाश्ता कर पेड़ की फुनगियों पर जमा होने लगते हैं. हमलोगों का शोर कम
होता जाता है. पक्षिओं का कलरव आसमान छूने लगता है. अब तो कोयल की कूक भी शामिल हो गयी है.

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