Monday, 9 October 2017

जीना इसी का नाम है - 1 !

बचपन का एक बेहतरीन आनंद पड़ोस के जज चाचा ने छीन लिया । दोनों के घर को बांटनेवाले 30x 4 फ़ीट के गलियारें में ही क्रिकेट खेलने की जगह बनती थी पर उनके खिड़की में कांच के शीशे लगे थे । इधर कुछ दिनों से मेरे सामने की खिड़की से सटकर बच्चे क्रिकेट खेलते रहते हैं । टेनिस बॉल कभी-कभी शीशे से भी टकराती रहती है । बच्चे जब सोये रहते हैं तो मैं नटखट बच्चों के दांत तोड़ लेता हूँ ये उन सभी को मालूम है । फिर भी वे डरते नहीं । उन्हें मालूम है की 100-200 रुपये के शीशे के चलते उनके अनमोल बचपन पर कोई अंकुश लगने वाला नहीं । खिड़की के बाहर का माहौल  बच्चे गुलज़ार रखते हैं और अंदर कंप्यूटर पर बैठा मैं ऊबता नहीं हूँ । मुझे बचपन जीना आता है ।

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