Monday, 27 July 2015

पुण्य-दान !



कल मै रोबिन्स विले न्यू जर्सी में बन रहे श्री स्वामी नारायण मंदिर दर्शनार्थ गया था. इतालियन मार्बल से बन रहा ये मंदिर विश्व का सबसे महँगा भारतीय मंदिर है. करीब 18 मिलियन डॉलर का यह भव्य भवन 10 वर्षों में बन कर 2017 में पूर्ण होगा. भारत में, 2000 कारीगर अनवरत मेहनत कर रहे हैं. भव्यता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि मंदिर की संगमरमर दीवारों और स्तंभों में श्री गणेश के 44 विभिन्न अवतार और मोर के 236 कलाकृतियाँ गढ़ी गयी हैं. रामायण और महाभारत के सन्दर्भ भी जगह-जगह दिख रहे थे.


वातावरण बहुत ही मनोहारी और व्यवस्थित लगा. मैंने पहली बार मंदिर के प्रांगण में लडको को ड्रोन उड़ाते देखा. मंदिर में किसी भी दर्शनार्थी को अधनंगे वस्त्रो में जाने की अनुमति नहीं थी. वहां वैसे लोगो के लिए शरीर को ढंकने के लिए वस्त्र दिया जा रहा था, गेरुआ लुंगी और एप्रन. मुझे बताया गया कि यहाँ की विधिवत पूजा में केवल गुजराती ही सम्मलित हो सकते हैं. कारण गुजराती भाषा में होने वाले श्लोकों का शुद्ध उच्चारण बताया गया.

इस मदिर के निर्माण में अगर 162 एकड़ जमीन का मूल्य भी जोड़ लें तो कीमत 100 मिलियन डॉलर को लांघ जायेगी. मेरे मित्र ने पूछा कि आखिर इतना पैसा आता कहाँ से है. तो गुजरात में सबसे बहुमूल्य हीरे का व्यापार होता है और यहाँ अमेरिका में गुजराती व्यापारी छाये हुए है, होटल से लेकर मॉल तक. सुनकर आश्चर्य होगा पर यहाँ की हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री का 40% हिस्सा गुजराती सम्हाले हुए हैं.

दूसरा प्रश्न जो पिछले प्रश्न का ही हिस्सा था. कौन हैं जो मंदिर के लिए इतना पैसा दान देते है. जाहिर है, जिनके पास पैसा और भक्ति है. वैसे लोग भी अवश्य होंगे जिन्हें ये बात समझ में आ गयी है कि वे अपना संचित धन अपने साथ लेकर अंत में नहीं जाने वाले. उन्हें यही समझ में आया होगा कि बजाय गरीबों की सहायता करने , सामाजिक कार्यों में अनुदान देने अथवा अपने निजो की खुशहाली के लिए खर्चा करने से ज्यादा श्रेयस्कर जरिया यही होगा अगले जन्म को सार्थक करने का.

दिखा तो ये कि मंदिर के पंडित और कार्यकर्ता हृष्ट-पुष्ट और दमदमा रहे थे. यहीं नहीं, ज्यादातर लोकप्रिय मंदिरों के रहनुमाओं का स्वास्थ्य देखने लायक होता है , चमक-दमक से लेकर पेट की गोलाई तक. शायद ये वही लोग हों जिन्होंने पिछले जन्म में मंदिरों को ज्यादा दान दिया हो.

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